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कपासिया खल — नागौर

कपास (बिनोला) की कच्ची खल, पारंपरिक घाणी से। 50 किलो बोरी, 365 दिन उपलब्ध, नागौर से सीधी आपूर्ति।

कपासिया खल

कपास (बिनोला) से निकाली गई कच्ची खल — पशुओं के लिए प्राकृतिक आहार।

महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज में कपासिया खल पारंपरिक कच्ची घाणी विधि से तैयार होती है। बिनोले को धीमी गति से पेरा जाता है, जिससे खल में तेल की मात्रा बनी रहती है और उसकी प्राकृतिक बनावट नहीं टूटती।

यही खल दूधियों और डेयरी यूनिटों की पहली पसंद है — दूध की मात्रा और उसमें घी-मक्खन की गाढ़ाहट, दोनों के लिए।

बोरी में भरी ताज़ा कपासिया खल की बनावट

उत्पाद विवरण

उत्पादकपासिया खल (कपास/बिनोला की खल)
रूपकच्ची खल — स्लैब व दाना
विधिपारंपरिक कच्ची घाणी (कोल्ड-प्रेस)
पैकिंग50 KG बोरी
उत्पादन स्थलनागौर, राजस्थान (NH-89)
उपलब्धता365 दिन

पैकिंग और आपूर्ति की मात्रा आवश्यकतानुसार तय की जा सकती है। थोक ऑर्डर के लिए संपर्क करें।

कच्ची खल और साधारण खल में फ़र्क़

कच्ची खल (MOI)
साधारण / सॉल्वेंट खल
कच्ची घाणी से धीमी पेराई
तेज़ गर्मी व रासायनिक विलायक से निष्कर्षण
तेल की मात्रा खल में बनी रहती है
तेल लगभग पूरा निकाल लिया जाता है
प्राकृतिक बनावट व ख़ुशबू बरकरार
सूखी, भुरभुरी बनावट
पशु आसानी से खाता है
स्वाद फीका, खपत कम
रोलर पर कपासिया खल की परत तैयार करते कारीगर

हम क्यों

नागौर की मिट्टी, नागौर की घाणी

कपास की पट्टी के बीचोंबीच, NH-89 पर — जहाँ बिनोला खेत से सीधे घाणी तक पहुँचता है।

पारंपरिक कच्ची घाणी

धीमी, ठंडी पेराई। वही तरीक़ा जो 1983 में शुरू हुआ था — इसलिए खल में तेल और प्राकृतिक गुण दोनों बचे रहते हैं।

ताज़ा उत्पादन, 365 दिन

साल भर चलने वाला प्लांट। खल स्टॉक में पड़ी-पड़ी पुरानी नहीं होती — ताज़ी बनती है, ताज़ी जाती है।

सोलर-संचालित प्लांट

प्लांट की छत पर लगे सोलर पैनल से उत्पादन — कम लागत, कम कार्बन, स्थिर आपूर्ति।

सीधा स्रोत, पारदर्शी काम

बिनोले की ख़रीद से लेकर बोरी की सिलाई तक — पूरी प्रक्रिया अपने ही परिसर में।

पूछताछ

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बोरी में भरी ताज़ा कपासिया खल की बनावट

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