महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज MOI GROUP महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज
hero.poster_alt

गाढ़ी खल, गाढ़ो दूध।

नागौर की कच्ची खल, पारंपरिक घाणी पर पेराई। हर लीटर में दिखने वाला फ़र्क़।

  • 365 दिन उत्पादन
  • कच्ची घाणी, सॉल्वेंट नहीं
महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज की 50 किलो बोरियों में भरी कपासिया खल, नागौर
43+
साल का अनुभव साल
2,500+
बोरी प्रतिदिन बोरी/दिन
100%
गुणवत्ता की गारंटी गुणवत्ता

हमारा उत्पाद

कपासिया खल

कपास (बिनोला) से निकाली गई कच्ची खल। पशुओं के लिए प्राकृतिक आहार।

महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज में कपासिया खल पारंपरिक कच्ची घाणी विधि से तैयार होती है। बिनोले को धीमी गति से पेरा जाता है, जिससे खल में तेल की मात्रा बनी रहती है और उसकी प्राकृतिक बनावट नहीं टूटती।

यही खल दूधियों और डेयरी यूनिटों की पहली पसंद है: दूध की मात्रा और उसमें घी-मक्खन की गाढ़ाहट, दोनों के लिए।

रेट व उपलब्धता पूछें
रोलर पर बनती कपासिया खल की रेशेदार परत बनावट देखने के लिए छुएँ

उत्पाद विवरण

उत्पादकपासिया खल (कपास/बिनोला की खल)
रूपकच्ची खल (स्लैब व दाना)
विधिपारंपरिक कच्ची घाणी (कोल्ड-प्रेस)
पैकिंग50 KG बोरी
उत्पादन स्थलनागौर, राजस्थान (NH-89)
उपलब्धता365 दिन

पैकिंग और आपूर्ति की मात्रा आवश्यकतानुसार तय की जा सकती है। थोक ऑर्डर के लिए संपर्क करें।

कच्ची खल और साधारण खल में फ़र्क़

कच्ची घाणी से धीमी पेराई
तेज़ गर्मी व रासायनिक विलायक से निष्कर्षण
तेल की मात्रा खल में बनी रहती है
तेल लगभग पूरा निकाल लिया जाता है
प्राकृतिक बनावट व ख़ुशबू बरकरार
सूखी, भुरभुरी बनावट
पशु आसानी से खाता है
स्वाद फीका, खपत कम
एक्सपेलर से बाहर आती ताज़ा कपासिया खल, नागौर प्लांट बनावट देखने के लिए छुएँ
महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज के प्लांट की छत पर सोलर पैनल, नागौर

हम क्यों

नागौर की मिट्टी, नागौर की घाणी

कपास की पट्टी के बीचोंबीच, NH-89 पर, जहाँ बिनोला खेत से सीधे घाणी तक पहुँचता है।

पारंपरिक कच्ची घाणी

धीमी, ठंडी पेराई। वही तरीक़ा जो शुरुआत से चला आ रहा है, इसलिए खल में तेल और प्राकृतिक गुण दोनों बचे रहते हैं।

ताज़ा उत्पादन, 365 दिन

साल भर चलने वाला प्लांट। खल स्टॉक में पड़ी-पड़ी पुरानी नहीं होती। ताज़ी बनती है, ताज़ी जाती है।

सोलर-संचालित प्लांट

प्लांट की छत पर लगे सोलर पैनल से उत्पादन: कम लागत, कम कार्बन, स्थिर आपूर्ति।

सीधा स्रोत, पारदर्शी काम

बिनोले की ख़रीद से लेकर बोरी की सिलाई तक, पूरी प्रक्रिया अपने ही परिसर में।

पेराई

क्या जाता है, क्या निकलता है

घाणी से पहले और बाद का बिनोला। स्लाइडर खींचकर देखिए।

एक्सपेलर से निकलती ताज़ा कपासिया खल कपासिया खल
पेराई से पहले बिनोला (कपास का बीज), नागौर प्लांट बिनोला
धीमी, ठंडी पेराई तेल को खल में ही छोड़ती है। दूधिये इसी के लिए इसे लेते हैं।

विरासत

1983 से नागौर में

महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज की शुरुआत एक घाणी, एक परिवार और एक ही ज़िद से हुई: खल में मिलावट नहीं।

आज भी वही विधि चल रही है। मशीनें बड़ी हुईं, पैमाना बढ़ा, पर खल बनाने का तरीक़ा वही रहा। यही वजह है कि नागौर और आसपास के दूधिये आज भी नाम से खल माँगते हैं।

“नागौर की सुप्रसिद्ध व भरोसेमंद कच्ची खल”

महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज, नागौर
महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज का मुख्य द्वार, NH-89 नागौर

किनके लिए

हमारे ख़रीदार

दूधिये व पशुपालक

जिनकी कमाई सीधे दूध की मात्रा और फैट पर टिकी है।

डेयरी व मिल्क यूनिट

जिन्हें साल भर एक जैसी गुणवत्ता की खल, तय मात्रा में चाहिए।

वितरक व थोक व्यापारी

जो अपने क्षेत्र में भरोसेमंद नाम की खल बेचना चाहते हैं।

50 किलो की बोरियों में भरी कपासिया खल, गोदाम, नागौर

पूछताछ

रेट पूछें या डिस्ट्रीब्यूटर बनें

नाम, फ़ोन और ज़रूरत बता दीजिए, हम ख़ुद संपर्क कर लेंगे। चाहें तो सीधे WhatsApp पर लिख दीजिए।

बोरी में भरी ताज़ा कपासिया खल की बनावट

या WhatsApp पर भेजें

संपर्क

नागौर आइए, घाणी देखिए

पता
महेश्वरी ऑयल इंडस्ट्रीज, NH-89, नागौर, राजस्थान
नक़्शे पर देखें
फ़ोन
+919462301727
ईमेल
info@moigroup.in
समय
सोम से शनि, सुबह 9 से शाम 7 · उत्पादन 365 दिन
WhatsApp पर पूछें कॉल करें